मातृ स्पर्श ... माता के स्पर्श मात्र से बचपन में किलकारी है बालक की मुस्कान मनोहर हर माता को प्यारी है ! अमीर गरीब माता नहीं होती माता केवल माता है सम भाव सागर ममता का बहता जहां...
दिल दिल आज बेकरार लगता है तेरी धड़कन का तलब गार लगता है ! टूटे ही नहीं अब तलक रोये भी बहुत जाने क्यूँ इश्क गुनहगार लगता है ! तेरी तलाश मैं हम खुद को खो बैठे जिंदगी का सफर बेकार सा ...
अरि मर्दन है तू ... नारी तू अरि चंडिका तू शक्ति रूपा तू भक्ति रूपा ! भू डोलन तू आंदोलन तू भय हारिणि अवलोकन तू ! नर्तन तू गायन है तू शंख नाद संग ताण्डव है तू ! खण्ड अखण्ड नव नूतन है त...