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प्रश्न

Drindiragupta.blogspot.in

प्रश्न 

यक्ष प्रश्न सी लिखी हुई है 

हर रेख चेहरे पर 

घूम घेर कर पूछ रही है 

क्या गलती थी जीवन भर ।

निश्चल नेह या निस्वार्थ कर्म 

क्या यही खोट था मेरा 

जिसके चलते जीवन से पहले 

पड़ाव आ गया मेरा ।

अनुत्तरित से अनेक प्रश्न 

आंखों में भरे हुए है 

हाय व्यथा कुछ कह न पाए 

कितने लाचार हुए है ।

आंख धुँधलका  मन मे विवशता 

क्या यही कर्म  प्रतिफल है 

घिरा रहा कलरव से बचपन 

आज सुना आंगन है ।

दे सके कोई इन प्रश्नों का उत्तर तो 

जीवन पाए विश्राम 

सतत चला अब शाम हो गई 

प्रश्न वही खड़ा अविराम ।

डा इन्दिरा✍️




Comments

  1. उत्कृष्ट रचना
    बहुत खूब लिखा आप ने
    लाजवाब प्रस्तुती

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया नीतू जी

      Delete
  2. आपकी लिखी रचना आज के "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 26 फरवरी 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभार सखी यशोदा जी

      Delete
  3. वाह!!!
    बहुत लाजवाब....

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया सुधा जी

      Delete
  4. बहुत बहुत आभार

    ReplyDelete
  5. ऐसा कमाल का लिखा है आपने कि पढ़ते समय एक बार भी ले बाधित नहीं हुआ और भाव तो सीधे मन तक पहुंचे !!

    ReplyDelete

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