Skip to main content

प्रश्न

Drindiragupta.blogspot.in

प्रश्न 

यक्ष प्रश्न सी लिखी हुई है 

हर रेख चेहरे पर 

घूम घेर कर पूछ रही है 

क्या गलती थी जीवन भर ।

निश्चल नेह या निस्वार्थ कर्म 

क्या यही खोट था मेरा 

जिसके चलते जीवन से पहले 

पड़ाव आ गया मेरा ।

अनुत्तरित से अनेक प्रश्न 

आंखों में भरे हुए है 

हाय व्यथा कुछ कह न पाए 

कितने लाचार हुए है ।

आंख धुँधलका  मन मे विवशता 

क्या यही कर्म  प्रतिफल है 

घिरा रहा कलरव से बचपन 

आज सुना आंगन है ।

दे सके कोई इन प्रश्नों का उत्तर तो 

जीवन पाए विश्राम 

सतत चला अब शाम हो गई 

प्रश्न वही खड़ा अविराम ।

डा इन्दिरा✍️




Comments

  1. उत्कृष्ट रचना
    बहुत खूब लिखा आप ने
    लाजवाब प्रस्तुती

    ReplyDelete
  2. वाह!!!
    बहुत लाजवाब....

    ReplyDelete
  3. अति आभार सखी यशोदा जी

    ReplyDelete
  4. ऐसा कमाल का लिखा है आपने कि पढ़ते समय एक बार भी ले बाधित नहीं हुआ और भाव तो सीधे मन तक पहुंचे !!

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वीरांगना सूजा कँवर राजपुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई

वीर बहुटी वीरांगना सूजा कँवर राज पुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई ..✊ सन 1857 ----1902  काल जीवन पथ था सूजा कँवर  राज पुरोहित का ! मारवाड़ की ऐसी वीरांगना जिसने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्र...

वीर बहुटी जालौर की वीरांगना हीरा दे

वीर बहुटी जालौर की वीरांगना हीरा दे सम्वत 1363(सन 1311) मंगल वार  वैशाख सुदी 5 को दहिया हीरा दे का पति जालौर दुर्ग के गुप्त भेद अल्लाउद्दीन खिलजी को बताने के पारितोषिक  स्वरूप मिले ...

वीरांगना रानी द्रौपदी

वीरांगना रानी द्रौपदी धार क्षेत्र क्राँति की सूत्रधार .! रानी द्रौपदी निसंदेह ही एक प्रसिद्ध वीरांगना हुई है जिनके बारे मैं लोगों को बहुत कम जानकारी है ! छोटी से रियासत की ...