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वीर बहुटी

वीर बहुटी  ✊
राज माता जीजाबाई 

राज माता जीजा बाई यानी जबरदस्त दोहरी शक्सीयत की महिला ...एक ओर जाँ बाज युद्ध प्रवीण नीति निपुर्ण निडर नारी दूसरी तरफ ऐसे सशक्त मातृत्व की धनी महिला जिसने अपने पुत्र को मराठा राज्य स्थापित करने का अनूठे गुण से परिपूर्ण किया !
जीजा बाई शाह जी भोंसले ...राजमाता जीजा बाई  या जीजाई  के नाम से जन साधारण मैं जानी जाती है !
जीजा बाई का जन्म 12जनवरी 1598 में हुआ था वह महराष्ट्र राज के बुलडाणा जिले के सिन्ड्खेडा के राज्य के लाखोरी गाँव मैं  लाखोजी राव के घर में हुआ था ! उनकी माँ का नाम मालसा बाई था !
उस समय की परम्परा के अनुसार उनका विवाह अल्प आयु में ही शाह जी राजे भोंसले के साथ कर दिया गया था जो निजाम शाही दरबार में सेन्य दल के सेना पति थे ! जीजा बाई ने 8 बच्चों को जन्म दिया 6 पुत्री और 2 पुत्र ! जिनमें छोटे पुत्र शिवा से उनका अत्यधिक स्नेह था !
जीजा बाई बेहद खूबसूरत , जहीन ,  वीर , और दूरदर्शी महिला थी ! अपनी अपार बुद्धि मत्ता और चतुराई से उंहोंने इतिहास में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये जो मराठा साम्राज्य के विस्तार के लिये सहायक सिद्द हुए ! उंहोंने अपने पुत्र शिवा को महज 17 वर्ष की उम्र में ही महान शासक बनने के सारे गुणों से सज्जित कर दिया था !
जीजा बाई कोई साधारण सी आम महिला नहीं थी वो एक सक्षम योद्धा और कुशल प्रशासक के रूप मैं इतिहास मैं अपना स्थान रखती है ! एक माता और पत्नी के अलावा भी उनमें बहुत गुण विंध्यमान थे !
जीजा बाई एक तेजस्वनी महिला थी जीवन काल मैं पग पग पर कठिनाइयों और विपरीत परिस्तिथियों को झेलते हुए भी उन्होंने कभी अपना धैर्य नहीं खोया ! एक स्वतंत्र हिंदू राष्ट्र बनाने के लिये उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी और उसी की स्थापना के लिये पुत्र शिवा को तय्यार कर रही थी ! जो आगे चल कर हिंदू समाज का संरक्षक और गौरव बना !
जीजा बाई के पति और पिता की किन्हीं कारणों से अनबन हो गई ! किसी एक को चुनना था जीजा बाई ने पति चुना ! वो अपने पति के साथ शिवनेरी के किले मैं रहती थी ! उंहे इस बात का बहुत अफसोस होता था पिता और पति दोनों किसी के आधीन काम करते है
! उनकी प्रबल इच्छा थी मराठों का खुद का अपना राज्य हो ! और भगवान ने उनकी सुनी उनका ये स्वप्न पूरा करने हेतु पुत्र शिवा उनकी झोली मैं डाला ! जिसने बड़े होकर मराठा राज्य की नींव रखी ! जीजा बाई के लिये आत्म सम्मान और उसके मूल्य सर्वोपरि थे ! अपनी दूरदर्शिता के लिये प्रसिद्ध जीजा बाई ने युवा होती पुत्र शिवा को अपने समस्त गुणों से परिपूर्ण किया !
वो मानवीय मूल्यों और रिश्तों को बहुत अहमियत देती थी ! महिलाओं का मान सम्मान ,  धर्मिक सहिष्णुता ,  और न्याय के साथ साथ उनमें राष्ट्र प्रेम कूट कूट कर भरा था ! उन्होंने अपना पूरा जीवन देश हित और हिंदू राष्ट्र की स्थापना मैं लगा दिया !
जीजा बाई  स्वयं अपनी जागीर की देख भाल करती थी ! जीवन की तमाम अच्छी बुरी घटनाओं के बीच ही उनके पति का देहांत हो गया ! और बड़े पुत्र सम्भा जी की अफजल खाँन ने हत्या कर दी !
अंतत : वो स्वर्णिम दिन जीजा बाई के जीवन मैं आया ...सन 1674 5 जून जब उनके पुत्र शिवा ने अपनी 76 वर्षीय जीजा बाई को उनके दिवा स्वप्न को साकार किया  ......एक हिन्दू मराठा साम्राज्य को स्थापित करके दिखलाया !
कैसा मनोरम द्रश्य हुआ होगा कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते है ...जब 76 वर्षीय जीजा बाई ने सजल नयनों , तृप्त हृदय और खुशी से लरजते हाथों से अपने वीर पुत्र शिवा के मस्तक पर राज्याभिषेक का कुमकुम तिलक लगा कर राज्याभिषेक किया होगा !
जीजा बाई का शरीर खुशी से कम्पित हो रहा होगा !  !
पुत्र गर्वीता माँ जीजा बाई ने स्नेह से पुत्र शिवा के उन्नत  भाल पर कुमकुम तिलक लगाया  सर पर हाथ रखा और तृप्तता का एहसास किया !
पर कोई नहीं जानता था वो इसी दिन के इंतजार मैं जीवित थी राज्याभिषेक के ठीक 12 दिन बाद 17 जून को उस तृप्त आत्म वीरांगना ने गो लोक की ओर गमन कर दिया मानो वो सिर्फ हिन्दू मराठा समाज्य की स्थापना के लिये ही जीवित थी ! हिन्दू राज्य की स्थापना होते ही वो तृप्त हृदया तपस्विनी चिर निद्रा मैं लीन हो गई !
जीजा बाई  की समाधी राजगढ़ किले के पचाड गाँव मैं आज भी स्तिथ है ! आकंठ हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की प्रबल इच्छा मैं डूबी एक महिला सिखा गई स्वप्न कैसे साकार किये जाते है !
नमन जीजा बाई को 🙏

1 जीजा बाई नाम एक
अखण्ड जीवटता का है
सिखा गई और दिखा गई
जीवन  कैसे जीया जाता है !
2
साधारण से सैन्य परिवार में
जिसका अति साधरण जन्म हुआ
प्रबल भाग्य लेकर लड़की ने
दुनियाँ मैं था कदम रखा !
3
12जनवरी सन 1598 में
लखु जी के घर जनम हुआ
माता मालसा बाई ने
पाल पोस कर बड़ा किया !
4
उस काल की प्रथा के चलते
बाल्य अवस्था विवाह हुआ
साह जी भोंसले उनके पति थे
आदिलशाह का  सेनापति हुआ !
5
विवाह बाद जीजा बाई
8 संतानों की मात बनी
6 पुत्रियां 2 पुत्र थे
जीजा नाम से विख्यात हुई !
6
जीजा बाई बड़ी जहीन थी
सुंदरता भर पुर मिली
बुद्धिमता और चतुराई
कूट कूट कर भरी हुई
7
साधारण महिला नहीं थी वो
सक्षम वीर योद्धा थी
कुशल प्रशासन देश भक्ति
रग रग  मैं उसके बहती थी !
8
माँ पत्नी के साथ साथ
वो एक विदुषी महिला थी
स्वतंत्र एक हिन्दू साम्राज्य हो
एसी उनकी मंशा थी !
9
जीवन राह सरल नहीं थी
पग पग कंटक बिछे हुए
विपरीत परिस्तिथियों मैं भी वो
धैर्य बराबर रखे हुए !
10
पिता और पिता के मध्य
तनीक नहीं बनती थी
दोनों मैं से एक चुनो
एसी पति की आज्ञा थी
11
आखिर पति को ही चुनना था
पतिव्रता महिला थी
रिश्तों को परिपूर्ण किया
वीर क्षत्राणी महिला थी

12
पिता पति दोनों सेवक थे
ये बात जीजा को चुभती थी
स्वतंत्र हिन्दू साम्राज्य मराठा
स्थापित करने की मंशा थी !
13
पुत्र शिवा पर पूरी आशा
पूरा विश्वास वो रखती थी
वीरों की लोरी सुना सुना कर
स्वाधीनता की लौ जलाती थी !
14
आत्म सम्मान मूल्य सर्वोपरि
एसा पाठ पढाती थी
योग्यता और दूरदर्शिता के
सब गुण शिवा मैं रोपती थी !
15
दूरदर्शिता के चलते
जब जितने भी फैसले  किये
इतिहास गवाह है आज भी
मराठा साम्राज्य स्तम्भ बने !

डा इन्दिरा  ✍
क्रमशः



Comments

  1. जीजा ऐड़ा पूत जिन्या ज्यों शिवाजी महाराज
    देश प्रेम सर्वोपरि, और आजाद मराठा राज ।

    जीजा बाई का व्यक्तित्व परिचय, काव्यात्मक व्याख्या बहुत सुंदर मीता ।

    ReplyDelete
  2. वीर बहुटी जीजाबाई की जीवनगाथा वीर रस से ओतप्रोत.....
    बेहतरीन ....लाजवाब......
    वाह!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. हौसला अफजाई का आभार

      Delete
  3. प्रिय इंदिरा जी -- भारत की महान नारी शक्ति और मातृशक्ति को समर्पित आपके लेख प्रेरणा भरे होते हैं | मैं पढती जरुर हूँ -- बस समयाभाव के कारण कई बार लिखना सम्भव नहीं हो पाता पर आपकी इतिहास की इन वीर बुद्धिमान नारियों पर आपके प्रेरणा भरे लेखन ने मुझे आपका प्रशंसक बना दिया है | इन वीरांगनाओं में अपने शौर्य और मेधा से समय की धार को मोड़ने का जज्बा था | जीजाबाई का नाम वीर शिवाजी की माँ होने के साथ - साथ नारी के आत्म सम्मान की प्रबल पक्षधर थी | इनका नाम इतिहास में सुनहरी अक्षरों में दर्ज है | उन्हें समर्पित कथा काव्य की पहली किश्त पढ़कर बहुत अच्छा लगा | सादर --

    ReplyDelete
  4. अहो भाग्य रेनू जी आप जैसी विदुषी की प्रसंशा यानी लेखन का सार्थक हो जाना ...मन सुकून से भर गया ! हौसला अफजाई करती सुंदर प्रतिक्रिया ने तो लेखन को और प्रवाह दे दिया !
    आपकी इस प्रतिक्रिया ने मेरे लेखन के उद्देश्य को सार्थक कर दिया ! इन वीरांगनाओं को इतिहास मैं जो जगह मिलना चहिये नहीं मिला कईयों के तो हम नाम भी नहीं जानते !
    मैं पिछले दो मह से इन्हीं वीरांगनाओ के बारे मैं लिख रही हूँ
    जीजा बाई 13 नायिका है ! आप सभी को पढ़े और प्रतिक्रिया दे मुझे अच्छा लगेगा !
    नमन

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  5. बहुत खूब
    उम्दा रचना

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  6. प्रिय इंदिरा जी -- मैं कोई विदुषी नहीं मात्र एक पाठक हूँ जो विद्वान्की ले लेखनीकारों की संगति में थोड़ा बहुत सीखने की इच्छा रखती हूँ | आपके सुरुचिपूर्ण लेखन का सम्मान करती हूँ | और दुसरे आप बहनों का स्नेह है | मेरा प्यार --

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  7. वाह वाह लाजवाब सुंदर रचना
    जीजाबाई की कर्तव्यनिष्ठा को नमन
    नमन उनकी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता को
    जीजाबाई को समर्पित उत्क्रष्ट रचना 👌👏🙇

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अब अपनी बारी

अब अपनी बारी ...नमन तुम्हे ओ वीर सपूतों
चरण नमन उस जननी को
जन्मा पुत्र सिह जियाला
धन्य कर गया धरती को !
माँ , बहन , बेटी और पत्नी
देश हिताय सब तज डाला
दूध मुंहे का मुख ना देखा
सब तज कर पी मृत्यु हाला !
रिश्ते कई शहीद कर गया
हृदय भरा हैं अश्को से
बाहर नही निकल पाते वो
कसमसा रहे सूखे लब पे !
उन्ही अश्को की तुम्हे कसम हैं
व्यर्थ ना उनको जाने देना
बूँद बूँद अपने बहते हैं
दुश्मन के लाखों बहा देना !
भोर और क्या साँझ सभी
अरि की धुँधली कर डालो
छाती फाड़ कर रक्त बहा दो
पापी की रूह कंपा डालो !
अब कदम उठाने से पहले
बार बार फिर कर सोचे
सोता सिह उठाने से
उड़ते हैं हाथो से तोते !
कसम तुम्हे हैं उस दुग्ध की
जो रग रग मेंं प्लावित हैं
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