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वीर बहुटी वीरांगना रानी बाघेली

वीरांगना रानी बाघेली
मारवाड  की पन्ना धाय  ...

क्रमशः
17
झट से मुख मोड़ा रानी ने
आंखों में आंसू जज्ब किया
कुँवर को कुँवरी के वस्त्र
आभूषणों में छुपा लिया !
18
वीर धीर जननी को उस पल
सिर्फ देश भक्ति ही याद रही
देश के खातिर जान भी देदू
ये तो मेरी कन्या थी !
19 
मन पर धर कर पत्थर
मुंह मोड़ कदम आगे रखा
कभी ना मूड कर फिर देखा
त्याग दिया भाग शरीर का !
20
खींची मुकुंद .कुंवर हरी सिंह
के साथ बुलुँदा चली आई
राजकुमार को छाती से लगा कर
अपनी संतान ही बतलाई !
21
कानों कान खबर नहीं थी
ना ही दासियों को भनक लगी
6 माह तक राजकुमार को
रानी पुत्री कह पाल रही !
22
पर एक दिवस हुई गलती
एक दासी ने देख लिया
पुत्री नहीं ये तो पुत्र है
जाने रानी क्या खेल रचा !
23
बुलुँद शहर में चर्चा फैली
रानी समझ नहीं पाई
कैसे रक्षा करूं कुँवर की
रहा ना महल सुरक्षित भाई !
24
फिर जुगत लगाई पीहर जाने की
नातिन को नाना से मिलवाने की
इसी आड़ में राज कुँवर को
महल से बाहर ले आई !
25
खींची मुकुंद दास हरी सिंह
दोनों ने फिर साथ दिया
सिरोही के कालिंदी गांव में
जयदेव ब्राम्हण को खोज लिया !
26
जयदेव एक पुष्करणा ब्राम्हण
रानी का निष्ठा वान सेवक था !
मर जाता पर भेद ना देता
रानी को विश्वास बड़ा था !
27
रानी ने तब राजकुमार को
जयदेव की पत्नी को सौंपा
वादा करो वयस्क होने तक
समझोगी अपना बेटा !
28
जोधपुर का उतराधिकारी
तुमको सौंप रही हूँ
माटी का कर्ज चुकाने का
स्वर्ण अवसर दे रही हूँ !
29
आज तलक में माँ थी
अब तुम इसकी महतारी
दूध नहीं रक्त पिला  पालना
ये जोधपुर का उत्तराधिकारी !
30
इतना कह कर रानी ने
राजकुमार को चूम लिया
कोख जनी  याद आ गई
अश्कों से तर्पण किया !
31
जाने  होगी या नहीं होगी
उसकी कोई खबर नहीं
इसे भी त्यागना पड रहा है मुझको
सदा माँ की ममता ही छली गई !
32
फिर धर कर धीरज रानी ने
अजीत जयदेव को थमा दिया
जान देकर रक्षा करनी है
इतना वचन भरवा लिया !
33
जयदेव रानी का सेवक
रानी से क्या कम पड़ता
रानी के शब्दों का मान
जीवन पर्यंत सदा रखा !
34
वयस्क हुए जब अजीत सिंह
राज सिंहासन पर बैठे
ऋणी रहे सदा सर्वदा
रानी बाघेली के त्याग तले !
35
इस तरह रानी बाघेली
बिना युद्ध करें वीरांगना थी
द्वंद युद्ध था ममत्व भाव से
जीती देश भक्ति थी !
36
जोधपुर राज्य की जनता
बाघेली को पन्ना धाय  कहे
ऐसी वीर नारी को
बार बार प्रणाम करें !
37
नारी थी या त्याग की प्रतिमा
देश हित संतान का त्याग किया
पन्ना धाय  की नहीं वंशजा
पर पन्ना जैसा काम किया !
38
एक जोधपुर दूजी उदयपुर
धरा मारवाड़ की धन्य हुई
ऐसी वीर नारियां जनती
धन्य है मारवाड़ की माटी !

डा इन्दिरा  ✍

Comments

  1. किन शब्दों में प्रशंसा की जाय , समझ नहीं आता!
    ऐसी वीर नारियां जनती
    धन्य है मारवाड़ की माटी !..... कुछ ऐसे ही अल्फाज़ कवयित्री के लिए भी !!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभार महोदय आपके शब्द पुरुस्कार की तरह !

      Delete

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अब अपनी बारी

अब अपनी बारी ...नमन तुम्हे ओ वीर सपूतों
चरण नमन उस जननी को
जन्मा पुत्र सिह जियाला
धन्य कर गया धरती को !
माँ , बहन , बेटी और पत्नी
देश हिताय सब तज डाला
दूध मुंहे का मुख ना देखा
सब तज कर पी मृत्यु हाला !
रिश्ते कई शहीद कर गया
हृदय भरा हैं अश्को से
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बार बार फिर कर सोचे
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