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वीर बहुटी वीरांगना नाना साहब की पुत्री मैना

वीर बहुटी नाना साहब पुत्री वीरांगना मैना ✊

        सन 1857 के विद्रोही नेता धूधू पंत नाना साहब कानपुर विद्रोह मैं असफल होने के बाद भागने लगे ! पर जल्दी जल्दी में अपनी किशोर पुत्री मैना को ले जा ना सके ! वो पिता के साथ बिठूर के महल मैं ही रहती थी !
अंग्रेजों ने बड़ी निष्ठुरता से महल के साथ राजकुमारी मैना को जिंदा जला दिया !
कानपुर के भीषण  हत्या काण्ड के बाद अंग्रेजों के सैनिक नाना साहब के महल जो बिठूर मैं था उसे लूटने और ध्वस्त करने बिठूर आये ! आधे से अधिक सम्पत्ति पहले ही लूट चुकी थी बची हुई सम्पत्ति को अपने कब्जे मैं कर महल को ध्वस्त करना चाहा .सैनिकों ने महल को ध्वस्त करने के लिये जैसे ही तोपें लगाई तभी महल के बरामदे मैं से एक अत्यंत सुंदर बालिका आकर  खड़ी हो गई ! अंग्रेज सेनापति आश्चर्य मैं भर गया क्योंकि महल लूटते वक्त ये बालिका नजर नहीं आई थी ! उस बालिका ने अंग्रेज सेनापति को किले पर गोली बरसाने से मना किया !
उसका करुणा भरा मुख और अल्प अवस्था को देख सेनापति हे को को भी उस पर दया आ गई ! सेनापति ने पूछा क्या चहती हो ..बालिका ने शुद्द अंग्रेजी में जवाब दिया ......क्या आप कृपा कर इस महल की रक्षा करेंगे ?
सेनापति ने कहा ....इसमें आपका क्या उद्देश्य है ?
वीर मैना डरी नहीं पलट कर सवाल ही किया ....आप बताइये आपका इस महल को गिराने मैं क्या उद्देश्य है ?
हे ने कहा ...ये महल विद्रोहियों के नेता नाना साहब का है सरकार ने इसी विध्वंस करने की आज्ञा दी है !
मैना सहज भाव से बोली .....आपके विरुद्ध नाना साहब ने अस्त्र उठाये थे तो वो दोषी है ! इस जड़ पदार्थ मकान ने आपका क्या अपराध किया है ..मेरा उद्देश्य इतना ही है ये स्थान मुझे अति प्रिय है इस लिये आपसे प्रर्थना करती हूँ इस मकां की रक्षा कीजिये !
मैं जानती हूँ आप जनरल हे है ! आपकी प्रिय कन्या मेरी
और में एक साथ पढ़ते थे ! वो मेरी अभिन्न मित्र थी ! कई वर्ष पूर्व वो मेरे पास बराबर आती थी ! कई बार आप भी उसके साथ हमारे घर आये है ! उसकी लिखी एक चिट्ठी भी है मेरे पास अब तक !
हे ने मैना को गौर से देखा तो पहचान गया ! ये नाना की पुत्री मैना है जो मेरी बेटी की सहचरी थी !
इतने मैं प्रधान सेनापति जनरल आऊटर वहाँ आ पहुंचे और बिगड़ कर जनरल हे को बोले अभी तक महल तोप से क्यों नहीं उड़ाया !
फिर मैना की तरफ देखा और बोले ..ओहो ये नाना की लड़की मैना है ?
मैना उसे देख डरी नहीं ना उसकी तरफ देखा .जनरल आउटर ने कहाँ अंग्रेजी सरकार की आज्ञा से हम तुम्हें गिरीफ्तार करते है !
मैना ने गम्भीरता से कहा मुझे कुछ समय दीजिये मैं अपने महल मैं बैठ कर जी भर के रोना चाहती हूँ !
ये सम्भव नहीं ...क्यों की नाना साहब के ऊपर अंग्रेजों को बहुत क्रोध था ! नाना साहब के वंश और महल पर दया दिखाना असम्भव है ! हे ने भी आउटर से मैना को छोड़ देने की सिफारिश की ! वो दोनों बात कर ही रहे थे की मैना वहाँ से गायब हो गई ! हे चले गये पर जनरल आउटर ने महल को चारों तरफ से घेर लिया ! महल का फाटक तोड़ा अंदर घुसे मैना को महल मैं ढूंढने लगे ! पर आश्चर्य पूरे महल में मैना कहीं  नहीं मिली !
फिर क्रूर जनरल आउटरम की आज्ञा से उसी समय नाना साहब के सूविशाल राज मन्दिर पर तोप के गोले बरसाये जाने लगे ! घंटे भर मैं आलीशान महल मिट्टी मैं मिला दिया गया !
यह एक एतिहासिक सच्चाई है की क्रांति के वीर सिपाही धूधू पंत नाना साहब की पुत्री मैना जो आजादी की नन्ही सिपाही थी जिसे अंग्रेजों ने महल के साथ जला कर मार डाला !
मात्र भूमि की रक्षा और उसकी स्वतंत्रता के लिये जिसने अपने प्रण न्यौछावर कर दिये !
उनका जीवन कर्म हमारे लिये गौरव और शन की बात है ! ऐसी गौरवशाली और विस्मृत परम्परा को शत शत नमन ...🙏

1
नाना साहब की पुत्री
बड़ी धीर वीर सी बाला थी
अति नाजुक पर साहसी
ऐसी ही उसकी फितरत थी !
2
अंग्रेजों के स्कूल मैं पढ़ती
उसकी अंग्रेज सहेली थी
सत्य बोलना और ना डरना
पिता नाना से सीखी थी !
3
पर दुर्भाग्य नन्ही मैना का
उसके साथ रहा आगे
बिना युद्ध के जिन्दा जल गई
अंग्रेजों की हठ के आगे !
4
सन 1857 विद्रोह युद्ध में
जब नाना की हार हुई
बिन सोचे समझे निकल गये
महल मैं मैना रह गई खड़ी !
5
भीषण विद्रोह के बाद सेना
अंग्रेजों की महल बिठूर आई
नाना का निज महल था भारी
उसमें लूट पाट की भारी !
6
महल गिरा कर ध्वस्त करो
ऊपर से आदेश मिला
तोपों के मुंह पर गोलों का
बारूद ठूंस कर भरा गया !
7
तभी अचानक सुन्दर कन्या
महल बरामदे मैं आई
देख के सब दंग रह गये
ये परी जात कहाँ से आई !
8
सेनापति नै  रोका तोपों को
जाकर ललना से बात करी
कौन कहाँ से आई हो
महल मध्य क्यों आके खड़ी !
9
मैना बोली मैं मैना
नाना साहब की पुत्री हूँ
आपकी बेटी के साथ पढ़ती थी
आपके लिये पुत्री सम हूँ !
10
मैना अंग्रेजी में फरफर
सेनापति से बोल रही
सकते मैं थे सारे सैनिक
ये लड़की है या बला कोई !
11
मैना बोली आपकी लड़ाई
मेरे पिता नाना से है
ये बेजान किला क्यों तोड़ रहे
इसमें क्या आपका आशय है !
12
ऊपर से आज्ञा है मुझको
मैं भी तोड़ना नहीं चाहता
अंग्रेजी हुकूमत नहीं मानती
इसी से महल तोड़ा जाता !
13
देर होती देख आउटरस
मैना के नजदीक गया
नाना की पुत्री है मैना तो
तुरंत ही गिरिफ्तार करो !
14
डरी नहीं वीर बालिका
ना आउटरस  की ओर देखा
मुझको जी भर रोने दो
कह अंतिम बार महल देखा !
15
आउटरस हे से बहस कर रहा
क्यों तोपों का मुंह बंद रखा
तभी गायब हो गई मैना
फिर अंग्रेजों उसे नहीं  देखा !
16
पूरा महल छान  डाला
मैना कहीं भी नहीं मिली
ध्वस्त कर दो महल को
आउटर ने फिर  आज्ञा देदी !
17
घंटे भर तक तोप  चली
गोलों पर गोले दगते थे
भारी महल राज मन्दिर के
दरों दीवार दरकते थे !
18
मिट्टी मैं मिला दिया महल को
साथ ही मैना भस्म हुई
जीवित जली देश के खातिर
मुख से उफ़ भी नहीं करी !
19
ऐतिहासिक सच्चाई से
कोई मुकर नहीं सकता
आजादी की नन्ही  सिपाही ने
देश हित बलिदान दिया !

डा इन्दिरा  .✍


Comments

  1. बहुत मर्मस्पर्शी रचना। वीर बहुटी का नाम सुनकर सीना गर्व से चौड़ा हो गया। कृतज्ञ हूं मैं साथ ही संपूर्ण देशवासी

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभार जीवन जी बेहतरीन प्रतिक्रिया मेरे लेखन को प्रवाह दे गई !
      🙏

      Delete
  2. मर्मस्पर्शी रचना नमन देश की वीरांगना को🙏

    ReplyDelete
  3. सादर नमन इस वीरांगना को !!इन्द्रा बहन आपको भी बहुत बहुत धन्यवाद इतनी खूबसूरत प्रस्तुति देने के लिए ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. स्नेहिल आभार शुभा जी

      Delete
  4. नमन है मेरे भारत की इस वीर कलमकारा को जो भूला इतिहास बता रही ही है वर्णा तो अधिकतर कलमकाराये श्रृंगार ही लिखती है

    ReplyDelete
    Replies
    1. स्नेहिल आभार चाचा भिखम सिंह जी आपकी प्रतिक्रिया लेखन का उत्साह वर्धन कर गई ...लेखनी को नया प्रवाह दे गई !
      नमन

      Delete

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दूध मुंहे का मुख ना देखा
सब तज कर पी मृत्यु हाला !
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हृदय भरा हैं अश्को से
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व्यर्थ ना उनको जाने देना
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