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वीर बहुटी जालौर की वीरांगना हीरा दे

वीर बहुटी जालौर की वीरांगना हीरा दे ...
क्रमशः .....
20
राजपूत सब शाक कर रहे
महलों के सारे द्वार खुले
ललनाए अग्नि प्रवेश कर रही
जौहर की प्रचण्ड सी ज्वाल जले !
21
भीषण कल्पना से हीरा दे
स्वेद बिंदू से नहा गई
ये क्या कर डाला पति ने
अफसोस भाव मन जगा गई !
22
इतना सारा अन्याय महज
चंद अशर्फीयों के खातिर
ऐसी दौलत पा क्या जीना
मर जाना अधिक ही बेहतर !
23
फिर सोचा उस रजपूती ने
यूं  बैठें से कुछ ना होगा
जतन करूं कुछ पाप कम हो
पति तो मेरा गद्दार हुआ !
24
हीरा दे बोली पति से
तूने किया अपराध बड़ा
सजा मिलेगी उसकी तुमको
जरा रह तू यही खड़ा !
25
दहिया तब हँस कर बोला
प्रिय सजा वजा सब जाने दो
जाओ तुम शृंगार करो
मेरे मन को हर्षाने दो !
26
इतना सुनते ही हीरा दे
आपे से बाहर हो आई
माथे से बिंदी पौंछी
हाथों मैं खड्ग उठा लाई !
27
तू क्या मुझको मारेगी
कह हंसा दाहिर खुल कर
उसी पल दाहिर का सर
कट गिरा  धरा के  ऊपर !
28
रक्त बूँद से नहा गई
आँखें भी रक्ताभ हुई
चण्डी का रूप धरे हीरा
देश द्रोह से मुक्त हुई !
29
एक हाथ में खड्ग लिये
दूजे में पति दाहिर का सर
हीरा पहुंची महलों मैं
सब बात कहीं होके अधीर !
30
दाहिर ने खिलजी को कैसे
महल का भेद बताया था
हार के लौट रहा था खिलजी
क्यों पलट के वापस आया था !
31
कान्ड्व देव रह गये देखते
हीरा दे के जज्बे को
उठ आसन से नमन किया
उस वीरांगना नारी को !
32
हीरा दे जैसी नारी
विरली ही पैदा होती है
अपनों से पहले देश रखे
ऐसी वीरांगना कहीं ना देखी है !
33
पति केवल परमेश्वर होता
घुटी मैं जिसे पिलाया था
उस माटी से ऐसी कन्या
निपजेगी अचरज सा होता !
34
देश भक्ति के लिये किसी का
राजा , रानी होना दरकार नहीं !
जज्बा हो देशभक्ति का दिल मैं
एक यही बात विशेष रही !
35
अफसोस बड़ा भारी मन को
यक्ष प्रश्न सा बना खड़ा
हीरा दे जैसी वीरांगना के खातिर
इतिहास क्यों मौन भाव रहा !
36 
श्रध्दा से सर झुक जाता है
जब ऐसे जियाले दिखते  है
जो हम सोच नहीं सकते
वो पल में कर गुजरते है !
37
आओ हम आज खड़े होकर
हीरा दे को  शीश झुकाते है
बड़ी तपस्या के बाद
ऐसे लोग धरा पर आते है !
38
धन धन है जालौर धरा
धन धन है वहाँ की माटी
हीरा दे जैसी बेटी के कारण
वन्दनिय है वहाँ की थाती !

नमन 🙏

डा इन्दिरा ✍



Comments

  1. सुंदर रचना
    हीरा दे जैसी नारी
    विरली ही पैदा होती है
    अपनों से पहले देश रखे
    ऐसी वीरांगना कहीं ना देखी है !
    नमन है बारम्बार वीरांगना हीरा दे को🙏🙏

    ReplyDelete
  2. सुंदर रचना
    हीरा दे जैसी नारी
    विरली ही पैदा होती है
    अपनों से पहले देश रखे
    ऐसी वीरांगना कहीं ना देखी है !
    नमन है बारम्बार वीरांगना हीरा दे को🙏🙏

    ReplyDelete

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अब अपनी बारी

अब अपनी बारी ...नमन तुम्हे ओ वीर सपूतों
चरण नमन उस जननी को
जन्मा पुत्र सिह जियाला
धन्य कर गया धरती को !
माँ , बहन , बेटी और पत्नी
देश हिताय सब तज डाला
दूध मुंहे का मुख ना देखा
सब तज कर पी मृत्यु हाला !
रिश्ते कई शहीद कर गया
हृदय भरा हैं अश्को से
बाहर नही निकल पाते वो
कसमसा रहे सूखे लब पे !
उन्ही अश्को की तुम्हे कसम हैं
व्यर्थ ना उनको जाने देना
बूँद बूँद अपने बहते हैं
दुश्मन के लाखों बहा देना !
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बार बार फिर कर सोचे
सोता सिह उठाने से
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जो रग रग मेंं प्लावित हैं
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कुछ करो कुछ कर जाओ
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