Drindiragupta. Blogspot. In तन्हा दूर कोई अपना सा याद आ गया आज फागुन की रुत फाग जगाये सोये भाव जगा गया आज । हुआ सिंदूरी क्षितिज का अंचरा नीले नभ मैं फैल गया यादो की ठप्पे दार चुनरिया पवन उड़ा कर खोल गया । महक रही केसर की क्यारी तेरी यादों से भीनी चटख चटख कर कालिया महकी याद आ गई सावन की । झिरमिर सा यादो का मेला इत उत झूले सा डोल रहा साँझ ढले कोई यायावर मन राहो से चला गया । चुभने लगा रंग सिंदूरी रतनारे सब रंग चुभे नयन मूंद चुप होजा मनवा अब भोर कहां जो शितिज रंगे। डा इन्दिरा✍️