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वीर बहुटि नन्ही बालिका चम्पा

वीर बहुटि महारणा प्रताप की बेटी चम्पा ✊ राणा लेकर परिजनो को वन वन भटक रहे थे संधि मंजूर नहीँ मुगलों से वनवास काट रहे थे । जंगल जंगल फिरते थे भूखे प्यासे चिंतित से घास की रोट...

वक़्त का खेल

वक़्त का खेल ही तो हैं नाजुक बदन सहेजने की जगह रौंदा गया जीवित पर डाला  गया तेजाब क्यों वक़्त का खेल ही तो हैं .... व्यभिचार बढ़ता गया व्याभिचारी बचता रहा मुकदमे तारीखें बदलत...

बिटिया दिवस

बिटिया दिवस जितनी संकुचित सोच हैं उतना अधिक दिखावा हैं बिटिया दिवस मनाते हैं हम नित जिसे कोख मेंं मारा हैं । नक्कारखाने मेंं तूती जैसी एक दिवस बिटिया का हैं बाकी साल उसे म...

विस्मय

विस्मय ...... विस्मय होता बादल मिलने रोज धरा पर धुंध बदल के क्यो आते नन्ही नन्ही बूंदो की पायल लाकर के पहना जाते ! कैसे यामिनी आँचल ओढ़े साथ जुगनुओं को लाती चमक दमक कर इत उत उड़ते ...

रात

रात ... ए रात तुझे में क्या लिखूं अंत लिखूं या आगाज लिखूं ए रात तुझे में क्या लिखूं ........ आज कल या विगत काल का मधुर मिलन अनुराग लिखूं , तारों वाली ओढ़ चुनरिया नव वधु का प्रीत विधान लि...

काव्य / फेसबुक और वाट्सअप

काव्य /फेस बुक और वाट्सअप श्रोता वक्ता हो गये वक्ता है अब मौन दादुर व्याख्याता हुए कोयल को पूछे कौन ! कवि गोष्ठी ना कहो चौपाल को भान कराय ऐरा गैरा कवि बना कविगण ही कवि अब नाय ! ...