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अहसास

अहसास ...💦

रेत
का जर्रा हूँ
कुछ नमी लिये हुए
मुट्ठी
में भींचे हूँ
कुछ
अश्क सूखे हुए !
मारिचिका
सा लुभाता
कहीं
दूर कोई ख्याल
सूखे लबों
पे प्यास की
हसरत लिये हुए !

डा इन्दिरा  ✍

Comments

  1. वाह दीदी जी गहरी सुंदर अभिव्यक्ति 👌

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  2. स्नेहिल आभार भाई 😁🙏

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