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ख्वाब

ख्वाब

मन
आज व्याकुल पंछी
सा
यादों में
उड़ी जाये
ख्वाब नहीं
तीखी पीड़ा है
क्या क्या
कुरेदा जाये !

डा इन्दिरा .✍

Comments

  1. तीखी पीडा।
    गहरी बात ।

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    1. मीता खूब samjhi. तुम बात ...👌

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