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चंद अल्फाज

चंद अल्फाज ...

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हर बात पर गहरी वो नजर रखते है
वफा हो या बेवफाई कायदे से निभा लेते है !
☘
ना उम्र का जिक्र हो ना अल्फाजों का बंधन
यहां इश्के कशिश जारी जो देखें केवल मन !
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चंद  अशआर ना चंद अजाने
इबादत है चंद अश्क दाने !
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सजदे में झुक जाना झुक कर दुआ करना
गर इश्के खताये है मंजूर खता करना !
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सजदा जिसको करते है खुदा मालूम देता है
मोहब्बत में इबादत का कहाँ मालूम देता है !
☘
एक गुनाह रोज सुबह शाम करता हूँ
खुदा से पहले माँ का नाम लेता हूँ !

डा इन्दिरा  .✍
स्व रचित

Comments

  1. बहुत सुंदर रचना 👌

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  2. सुंदर भावों की अभिव्यक्ति

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  3. वाह !! ना उम्र की सीमा ना शब्दों का बंधन
    उम्दा मीता

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  4. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 3 अक्टूबर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



    .

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  5. बहुत ही सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति।

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  6. सजदे में झुक जाना झुक कर दुआ करना
    गर इश्के खताये है मंजूर खता करना ! ..बहुत ही सुन्दर भाव...

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  7. बेहतरीन रचना...
    ना उम्र का जिक्र हो ना अल्फाजों का बंधन
    वाह!!!

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  8. बहुत भावपूर्ण रचना प्रिय इंदिरा जी -- ये पंक्तियाँ खास तौर पर कबिलेदाद हैं --
    सजदे में झुक जाना झुक कर दुआ करना
    गर इश्के खताये है मंजूर खता करना !
    सजदा जिसको करते है खुदा मालूम देता है
    मोहब्बत में इबादत का कहाँ मालूम देता है !!!!!!!!!!!! सादर --

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