रात ... ए रात तुझे में क्या लिखूं अंत लिखूं या आगाज लिखूं ए रात तुझे में क्या लिखूं ........ आज कल या विगत काल का मधुर मिलन अनुराग लिखूं , तारों वाली ओढ़ चुनरिया नव वधु का प्रीत विधान लि...
काव्य /फेस बुक और वाट्सअप श्रोता वक्ता हो गये वक्ता है अब मौन दादुर व्याख्याता हुए कोयल को पूछे कौन ! कवि गोष्ठी ना कहो चौपाल को भान कराय ऐरा गैरा कवि बना कविगण ही कवि अब नाय ! ...
वीर तनय अभिनंदन .... सब मिल कर गुहार लगाओ केसरी नन्दन के दरबार मेंं अभिनंदन को प्रभु छुड़ाओ सकुशल लौटे घर बार मेंं ! बाल ना बांका हो उसका ना कोई उसको पीड़ा हो दुश्मन के हत्थे चढ़...
तमन्ना है तमन्ना रण बकुरौ का व्यर्थ ना बलिदान जाये जीवन सुरक्षित हो सदा नाहक ना कोई प्राण जाये ! सुन तमन्ना ईश मेरे हर मांग का सिन्दूर चमके भरी रहे हर गोद माँ की हाथ की चूड़ी ...
शरद ऋतु .... शीत काल की हुई विदाई शरद ऋतु इठलाती आई पवन बहे चंचल अति भारी फुनगी-फुनगी ,डारी-डारी ! रीते मेघ खेलते फिरते ना -ना प्रकार , रूप वो धरते भूल गई हो शीत चुनरिया ओढ़ उसे मन मा...
धरती पुत्र.... धरती पुत्र कहते है मुझको पर मेरी कोई धरा नही माता का अहसास तो है पर माता मेरे पास नही ॥ मेंं अति निर्धन गरीब पुत्र हूँ नही पास है धन मेरे पुत्र अमीर जो रहे हवेली ...
करार .... दिल कुछ बेकरार लगता हैं करारे दिल का तलब गार लगता हैं ! टूटें ही नही आज तलक , रोए भी बहुत हैं मेरा इश्क ही मुझे , गुनहगार लगता हैं ! तेरी इक तलाश मेँ , खुदी को खो दिया , खुदी की तल...