में चुप हूँ
आज
तुम बोलो
जर्रा जर्रा
मन पट खोलो !
बहते बहते
मेरे घट में
सहज सरस
रस सा घोलो !
प्यार ...मनुहार
या वीतराग कुछ
जो चाहो सो गाओ
जीवन को
पुनि राग बनाओ
बूँद बूँद
कर जीलो ! !
खुशबू जैसे लोग मिले अफसानों मैं एक पुराना खत जो खुला अनजाने मैं । कतरा कतरा लफ्ज बह रहे थे अंदर स्याही अब तक गीली थी अफसानों में । कोई आहट आज भी दस्तक देती है जब भी फुर्सत होत...
वीर बहुटी सिंध के राजा दाहिर की पत्नियाँ और पुत्रियाँ सिंध के राजा दाहिर की बेटियों और पत्नियों ने भी देश रक्षा हित अपनी जान देदी पर शत्रु के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया ...
वीरांगना रानी द्रौपदी धार क्षेत्र क्राँति की सूत्रधार .! रानी द्रौपदी निसंदेह ही एक प्रसिद्ध वीरांगना हुई है जिनके बारे मैं लोगों को बहुत कम जानकारी है ! छोटी से रियासत की ...
खूबसूरत रचना इंदिरा जी
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना . ..👌👌👌
ReplyDeleteबहुत खूब
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