आधी दुनियाँ
कहलाने वाली
छद्म भाव से छली गई !
भावुकता का
दोहन करके
कोमल हिय में सैध करी !
नेह बना
पाँव की बेडी
हाथ रिश्तो से बंधे हुए !
नयन सदा
भीगे ही रहते
घर आंगन बस याद रहे !
वीर बहुटी सिंध के राजा दाहिर की पत्नियाँ और पुत्रियाँ सिंध के राजा दाहिर की बेटियों और पत्नियों ने भी देश रक्षा हित अपनी जान देदी पर शत्रु के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया ...
वीर बहुटी वीरांगना सूजा कँवर राज पुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई ..✊ सन 1857 ----1902 काल जीवन पथ था सूजा कँवर राज पुरोहित का ! मारवाड़ की ऐसी वीरांगना जिसने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्र...
वीर बहुटी जालौर की वीरांगना हीरा दे सम्वत 1363(सन 1311) मंगल वार वैशाख सुदी 5 को दहिया हीरा दे का पति जालौर दुर्ग के गुप्त भेद अल्लाउद्दीन खिलजी को बताने के पारितोषिक स्वरूप मिले ...
मर्मस्पर्शी रचना
ReplyDeleteआभार
Deleteबहुत ही ह्दयस्पर्शी.. महोदया !👌👌👌
ReplyDeleteभावपूर्ण रचना
ReplyDeleteशुक्रिया
ReplyDeleteसच्च में बहुत बढ़िया है। चंद पंक्तियों में ही आपने आधी आबादी के भाव को बांध दिया। इसी विषय पर आज मैंने 'साहित्य आजतक' में चर्चा देखा।
ReplyDeleteबहुत खूब गागर में सागर व्यथित नारी का गहन चित्रण।
ReplyDeleteअप्रतिम रचना मीता ।
वाह !!! बहुत खूब
ReplyDeleteशुक्रिया
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