Skip to main content

Posts

अंकुरण

अंकुरण ...🌾 हो अंकुरण नव भावों का घुटन भरी हर द्रष्टि का प्रकृतिक मरते भावों का विद्रूपता लिये समाजों का ! अंकुरण चाहिये हर ओर  सखे नव भोर प्रभाती पावन  में उषा घट छलके नव अमि...

अग्नि शिखा अवतरण

अग्नि शिखा अवतरण ... अग्नि शिखा अवतरित बाला दहक रही बन कर ज्वाला नस नस में दह्के चिंगारी जहर भरी मानो हाला ! सदियों से जलती आई हूँ अग्नि परीक्षा देती  अग्नि शिखा स्वयं बन आई अब ...

उद्धव / सखी ...उवाच

उद्धव / सखियाँ ...उवाच ... बोली सखियाँ सुनो उद्धव जी अनहोनी सी बात कहीं जाओ यहाँ रंगे सबई श्याम रंग दूजे  रंग की काहे बात चलाओ ! मेरे श्याम की काली कमली दूजों रंग ना वाकू भाय एसो पक...

रूप / असि

रूप / असि अपनों मुख असि में देख के राधे जी सकुचाय ऐसों रूप संभालूं कैसे जापे हरी वारी  जाये ! नयन कजरा आँजन बैठूं कान्हा भासित सम होवे अँखियन बीच बैठ के जैसे काजर कोर बसे होवे ! ...

विश्वास

विश्वास .. बिन  विश्वास आस नहीं बिन आस नहीं कोई बात बिन बात विश्वास क्या यही प्रेम आधार ! यही प्रेम आधार सुनो हिय खोल के ताले विश्वास पर ही टिके है सूरज .चंदा .और सितारे ! इसी डोर विश्वास बांध कर नदियां सागर ओर  बहे पंछी पंख पसार धरा से ऊंचे नभ उड़ान भरे ! पाहन नहीं ये पावनता है कह गीरीवर सब नमन करें जल नहीं सुरसरि प्रवाहित करें  आचमन अंजुरी भरे ! चार अक्षर नहीं चार दिशा में सशक्त विश्वास संचार करें दिग दिगंत और चहुँ दिशा में ब्रम्ह नाद सा भान  करें ! इसी एक शब्द के बल पर शबरी के घर राम गये इसी शब्द ओज के बल पर हनुमत परम प्रिय भगत बने ! ये शब्द गर ना होता तो ना राधे का आदर होता श्याम से पहले राधे रख कर कोई ..राधेश्याम नहीं कहता ! पर ..... नाजुक है तनि कोमल गात है नैनो की कोर से चोट लगे लेशमात्र  भी संशय का विष मृत प्राय कर नष्ट करें ! शब्द विश्वास सदा चाहता सिक्त भाव मन पूर्ण समर्पण नैन  मूँद कर चलो साथ में जैसे नर और नारायण ! डा इन्दिरा गुप्ता " यथार्थ "  ✍

सीप

सीप ... सीप मातृ कोख के जैसी गुण अवगुण सब रख लेती नव सृजन करती है प्रति पल आत्मसात सब कुछ करती ! स्वाति बूँद गिरे जो भीतर सच्चे मोती  सा गढती निर्मल जल बूँद होय तो व्यर्थ ना उसको ...

बाबूजी

बाबूजी ... बाबूजी सघन वृक्ष के जैसे माँ केसर की क्यारी माँ के माथे की गोल सी बिंदी बाबूजी से रतनारी ! बाबूजी प्यास पर्याय है भूख का सतत उपाय उड़ते पंखों का खुला आकाश है थके तो का...