Skip to main content

वचन

वचन

जाते जाते पी की नगरी
यहाँ धान बिखराऊ
धन धान्य से भरा रहे मायका
जब भी वापस आऊँ !
यही बिखेर सकती हूँ कुछ भी
वहाँ ना मन मानी होगी
सभी समेटना होगा पी घर
वहाँ तो जिम्मेदारी होगी
हँसना खेलना और मुलकना
संग धान के छोड़ चली
साथ ले चली वचन तुम्हारा
बिटिया सब करना सही !

डा इन्दिरा  .✍

Comments

  1. सासु सुसरा रो वंश बढाओ सुवटडी
    जस लिजो, सौ सुख पावो लाडली।
    कोमल भावनाएं लिये सुंदर रचना ।

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर उक्ति..
    कोमल सुंदर भावनाओं ..

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वीर बहुटी .वीरँग्नाये सिंध के राजा दाहिर की पत्नियां और पुत्रियाँ

वीर बहुटी सिंध के राजा दाहिर की पत्नियाँ और पुत्रियाँ सिंध के राजा दाहिर की बेटियों और पत्नियों ने भी देश रक्षा हित अपनी जान देदी पर शत्रु के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया ...

वीरांगना सूजा कँवर राजपुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई

वीर बहुटी वीरांगना सूजा कँवर राज पुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई ..✊ सन 1857 ----1902  काल जीवन पथ था सूजा कँवर  राज पुरोहित का ! मारवाड़ की ऐसी वीरांगना जिसने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्र...

पुराने खत

खुशबू जैसे लोग मिले अफसानों मैं एक पुराना खत जो खुला अनजाने मैं । कतरा कतरा लफ्ज बह रहे थे अंदर स्याही अब तक गीली थी अफसानों में । कोई आहट आज भी दस्तक देती है जब भी फुर्सत होत...