वीर बहुटी सिंध के राजा दाहिर की पत्नियाँ और पुत्रियाँ सिंध के राजा दाहिर की बेटियों और पत्नियों ने भी देश रक्षा हित अपनी जान देदी पर शत्रु के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया ...
खुशबू जैसे लोग मिले अफसानों मैं एक पुराना खत जो खुला अनजाने मैं । कतरा कतरा लफ्ज बह रहे थे अंदर स्याही अब तक गीली थी अफसानों में । कोई आहट आज भी दस्तक देती है जब भी फुर्सत होत...
वीर बहुटी वीरांगना सूजा कँवर राज पुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई ..✊ सन 1857 ----1902 काल जीवन पथ था सूजा कँवर राज पुरोहित का ! मारवाड़ की ऐसी वीरांगना जिसने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्र...
ये शाम की तन्हाईयां ऐसे मे तेरा गम
ReplyDeleteवाह उम्दा
बहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत खूब...
ReplyDeleteवाह दीदी जी खूबसूरत पंक्तिया 👌
ReplyDeleteइस सूनेपन का भी अहसास अनोखा होता है
किसी खास के ना होने का एहसास इसी में होता है