Skip to main content

चयन

चयन

खोल रहा जो दर स्कूल का
या दर जेल का बन्द करे
कौन प्रिय कौन श्रेष्ठ है
आओ उसका चयन करें !

चुनाव श्रेष्ठ का सरल नहीं है
प्रिय भी है अनमोल सही
प्रेम प्रलोभन कह ठुकराना
संकीर्ण विचार और कुछ भी नहीं !

दोनों भिन्न पर प्रबल प्रलोभन
दोनों उदभव दोनों उदबोधन
सभी बंधे है इसमें कस कर
पर विरोध करते है जम कर !

प्रेम छोड श्रेष्ठ को धाये
पुनि पलट कर वापस आये
यही प्रक्रिया जीवन भर चलती
प्रिय मिले ना श्रेष्ठ को पाये !

डा इन्दिरा ..✍
स्व रचित

Comments

  1. प्रेम प्रलोभन कह ठुकराना
    संकीर्ण विचार और कुछ भी नहीं !
    प्रेम छोड श्रेष्ठ को धाये
    पुनि पलट कर वापस आये ....
    बहुत ही सुंदर । प्रेम की श्रेष्ठता को स्वीकार करना ही जीवन है।

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना आदरणीया दी

    ReplyDelete
  3. वाह सखी
    बहुत सही कहा 👌बहुत ही सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  4. वाह अनुठी रचना मीता बहुत सुंदर।

    ReplyDelete
  5. प्रेम छोड श्रेष्ठ को धाये
    पुनि पलट कर वापस आये
    यही प्रक्रिया जीवन भर चलती
    प्रिय मिले ना श्रेष्ठ को पाये !
    बहुत खूबसूरत चयन....
    वाह!!!

    ReplyDelete
  6. वाह बहना -- सही लिखा आपने | जो सही निर्णय ना ले उसके साथ ये होना तय है -
    प्रेम छोड श्रेष्ठ को धाये
    पुनि पलट कर वापस आये
    यही प्रक्रिया जीवन भर चलती
    प्रिय मिले ना श्रेष्ठ को पाये !!!!!!!
    क्योकि कबीर जी ने कहा है -
    प्रेम ना बाडी उपजे-- प्रेम ना हट बिकाय -
    राज प्रजा जेंहि रुचे - शीश देहि लिए जाय !!!!!!!! सस्नेह

    ReplyDelete
  7. बहुत शानदार रचना

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वीरांगना सूजा कँवर राजपुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई

वीर बहुटी वीरांगना सूजा कँवर राज पुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई ..✊ सन 1857 ----1902  काल जीवन पथ था सूजा कँवर  राज पुरोहित का ! मारवाड़ की ऐसी वीरांगना जिसने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम मैं मर्दाने भेष में हाथ मैं तलवार और बन्दूक लिये लाड्नू (राजस्थान ) में अंग्रेजों से लोहा लिया और वहाँ से मार भगाया ! 1857 से शुरू होकर 1947 तक चला आजादी का सतत आंदोलन ! तब पूर्ण हुआ जब 15 अगस्त 1947 को देश परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त हुआ ! इस लम्बे आंदोलन में राजस्थान के योगदान पर इतिहास के पन्नों मैं कोई विशेष  चर्चा नहीं है ! आजादी के इतने  वर्ष बीत जाने के बाद भी राजस्थानी  वीरांगनाओं का  नाम और योगदान कहीं  रेखांकित नहीं किया गया है ! 1857 की क्रांतिकी एक महान हस्ती रानी लक्ष्मी बाई को पूरा विश्व जानता है ! पर सम कालीन एक साधारण से परिवार की महिला ने वही शौर्य दिखलाया और उसे कोई नहीं जानता ! लाड्नू  में वो मारवाड़ की लक्ष्मी बाई के नाम से जानी और पहचानी जाती है ! सूजा कँवर का जन्म 1837 के आस पास तत्कालीन मारवाड़ राज्य के लाडनू ठिकाने नागौर जिले ( वर्तमान मैं लाडनू शहर )में एक उच्च आद

वीरांगना रानी द्रौपदी

वीरांगना रानी द्रौपदी धार क्षेत्र क्राँति की सूत्रधार .! रानी द्रौपदी निसंदेह ही एक प्रसिद्ध वीरांगना हुई है जिनके बारे मैं लोगों को बहुत कम जानकारी है ! छोटी से रियासत की रानी द्रौपदी बाई ने अपने कामों ये सिद्द कर दिया की भारतीय ललनाओ मैं भी रणचण्डी और दुर्गा का रक्त प्रवाहित है ! धार मध्य भारत का एक छोटा सा राज्य जहां के  निसंतान  राजा ने  देहांत के एकदिन पहले ही अवयस्क छोटे  भाई को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया 22 मैं 1857 को राजा का देहांत हो गया ! रानी द्रौपदी ने राज भार सँभला ! रानी द्रौपदी के मन मैं क्राँति की ज्वाला धधक रही थी रानी के राज संभालते ही क्राँति की लहर द्रुत गति से बह निकली ! रानी ने रामचंद्र बाबू को अपना दीवान नियुक्त किया वो जीवन भर रानी के समर्थक रहे ! सन 1857 मैं रानी ने ब्रितानिया का विरोध कर रहे क्रांतिकारीयों  को पूर्ण सहयोग दिया सेना मैं वेतन पर अरब और अफगानी सैनिक नियुक्त किये जो अंग्रेजों को पसंद नहीं आया ! अंग्रेज रानी द्रौपदी की वीरता और साहस को जानते थे सम उनका खुल कर विरोध नहीं करते थे ! और रानी कभी अंग्रेजो से भयभीत नहीं हुई उनके खिलाफ क्रँतिक

वीर बहुटी ..वीरांगना जैतपुर की रानी

वीर बहुटी वीरांगना जैतपुर की रानी ..✊ बात उस समय की जब ईस्ट इंडिया कम्पनी विस्तार नीति का पालन कर रही थी ! लार्ड क्लाइव ने भारत में ब्रितानी राज्य की स्थापना की ! जिसे लार्ड कार्न्वलीस और लार्ड बेलेजली  ने भारत के कोने कोने में फैला दिया ! लार्ड डलहौजी ने हड़प की नीति अपनाते हुए झांसी .सतारा .आदी राज्यों को कम्पनी साम्राज्य में मिला लिया ! बाकी बचे राजाओं और सरदारों के अधिकार भी समाप्त कर दिये ! लार्ड एलन वर्ड ने जैतपुर जैसी छोटी सी रियासत के स्वतंत्र अस्तित्व को तहस नहस कर दिया ! जैतपुर बुंदेलखंड की एक छोटी सी रियासत थी ! कम्पनी सरकार ने 27 नवम्बर सन 1842 ई में जैतपुर पर अधिकार कर उसे ब्रितानी राज्य में मिला लिया ! उस समय जैतपुर में आजादी का प्रेमी राजा परीक्षित शासन करते थे ! उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य ब्रितानी सत्ता को भारत से जड़ से उखाड़ फैंकना था ! पर वह कम्पनी सरकार की तुलना में बहुत कमजोर और कम थे ! अतः कम्पनी सरकार ने बहुत आसानी से उन्हें पराजित कर जैतपुर पर अपना अधिकार कर लिया ! ऐसी स्तिथि में राजा परीक्षित को अपना जैतपुर छोड़ कर भागने को विवश होना पड़ा ! ब्रिटिश सरकार ने अ