Skip to main content

सतरंगी देह ...

..सतरंगी सी देह 

वीरहन को याद आ रहा साजन का भुजपाश 
अगन लगाऐ देह मेंं मन मेंं खिला पलाश । 

सवारियां रंगरेज ने की रंगरेजी खूब 
फागुन की रैना गईं रंग मेंं डुबम डूब । 

सतरंगी सी देह पर चूनर है पचरंग 
तन मेंं बजती बांसुरी मन मेंं बजे मृदंग । 

जवां कुसुम के फूल से लाल हो गये नैन 
टेसू मद भरता फिरे मन घूमे  बैचेन  । 

बरजोरी कर लिख गया भीगे तन पर छन्द 
ऊपर से रूठी दिखे मन बरसे आनन्द  । 

डॉ़ इन्दिरा  गुप्ता  यथार्थ 

Comments

Popular posts from this blog

वीर बहुटी .वीरँग्नाये सिंध के राजा दाहिर की पत्नियां और पुत्रियाँ

वीर बहुटी सिंध के राजा दाहिर की पत्नियाँ और पुत्रियाँ सिंध के राजा दाहिर की बेटियों और पत्नियों ने भी देश रक्षा हित अपनी जान देदी पर शत्रु के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया ...

वीरांगना सूजा कँवर राजपुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई

वीर बहुटी वीरांगना सूजा कँवर राज पुरोहित मारवाड़ की लक्ष्मी बाई ..✊ सन 1857 ----1902  काल जीवन पथ था सूजा कँवर  राज पुरोहित का ! मारवाड़ की ऐसी वीरांगना जिसने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्र...

पुराने खत

खुशबू जैसे लोग मिले अफसानों मैं एक पुराना खत जो खुला अनजाने मैं । कतरा कतरा लफ्ज बह रहे थे अंदर स्याही अब तक गीली थी अफसानों में । कोई आहट आज भी दस्तक देती है जब भी फुर्सत होत...