मातृ स्पर्श ... माता के स्पर्श मात्र से बचपन में किलकारी है बालक की मुस्कान मनोहर हर माता को प्यारी है ! अमीर गरीब माता नहीं होती माता केवल माता है सम भाव सागर ममता का बहता जहां...
दिल दिल आज बेकरार लगता है तेरी धड़कन का तलब गार लगता है ! टूटे ही नहीं अब तलक रोये भी बहुत जाने क्यूँ इश्क गुनहगार लगता है ! तेरी तलाश मैं हम खुद को खो बैठे जिंदगी का सफर बेकार सा ...
अरि मर्दन है तू ... नारी तू अरि चंडिका तू शक्ति रूपा तू भक्ति रूपा ! भू डोलन तू आंदोलन तू भय हारिणि अवलोकन तू ! नर्तन तू गायन है तू शंख नाद संग ताण्डव है तू ! खण्ड अखण्ड नव नूतन है त...
भस्म करो या तृप्त करो .... आंखों में भर ओज का रौरव उठ भी जाओ सोते क्यों हो शिवा प्रताप के तुम हो वंशज हैरानी सी बोते क्यों हो ! जिन आंखों में ज्वाला धधके बांह उन्हीँ की रह रह फडके श...
शजर ( वृक्ष ) .... नग्न शजर चुपचाप खड़ा है पात पात कर झरता है जैसे बच्चे एक एक कर घर को छोड़ निकलता है ! मनई धरा निर्जला हो गई कंकरीट से भाव हुए पुष्प वहां कैसे हो सुरभित जहाँ पाथर से ज...
बंजर सा मन ..... जीवन के इस उहां पोह में मन बंजर हो जाये दरक गई सुखी धरती लफ्ज ना उगने पाये ! सायं सायं भावों का अंधड़ यादों को गर्माये पिघल पिघल कर गिरे धरा पर मन पिघला सा जाये ! अतृप...
आहट ... दबी दबी सी आहट होती थम थम कर रुक जाती है जैसे कोई धीमे धीमे सोच सोच कर चलता है ! कुछ बोले या चुप रह जाये उलझे से जज्बात हुए कहते कहते रुक जाता है रुकते रुकते कहता है ! लफ्जों ...